झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई,

उड़ावे भाई जी ओहडो माहरे भाई,

झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई,

माई रे री शुभ वेला में मंगल गीत सुनावा जी,

भात भरण ने भाई भतीजा भावज आई,

झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई,

पेहरिये से चुनड़ लेकर मीरो माहरो आयो जी,

सास नंद की चुनड़ी ने खूब सजाई,

झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई,

वंश बड़े महारे बाबुल को युग युग जेवे भाई जी,

सौरव मधुकर आख्या म्हारी भर भर आई,

झिलमिल तारा ऋ आ चुनरी उढावे भाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।