बता दे पुरवईया भवानी कब आयेगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बता दे पुरवईया भवानी कब आयेगी।

भवानी कब आयेगी, दर्श दिखलाएगी॥

मैंने सुना है माँ के आँगन, सुख का सावन बरसे।

कभी कोई ना खली लौटा, महारानी के दर से।

किस्मत के मारो की कब, झोली भर जायेगी॥

डाली चिठ्ठी भेजे संदेसे, कोई जवाब ना आया।

ना मेरे घर आई तू मैया, न ही मुझे बुलाया।

बैठा हूँ मैं इसी भरोसे, कभी तो फेरा पाएगी॥

रोम रोम में बसी भवानी, मैं उस का दीवाना।

उसके दर के सिवा ना कोई, मेरा और ठिकाना।

प्यार से मैया कभी तो मुझको गोदी बीठलाएगी॥

दीपक आशाओं का मेरे कहीं यह बुझ न जाए।

तरस रही हैं आखें मेरी व्याकुल मन घबराए।

मुरझायी बगिया को अम्बे कभी महकाएगी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।