साधु भाई अवगत लिखियो ना जाई

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

साधो भाई अवगत लिखियो ना जाई,

जो कोई लिखसी संन्त शूरमा ,नूरा में नूर समाई,

जैसे चन्दा उदक में दरसे ,ज्यूँ सायब सब माही,

दे शष्मा घट भीतर देखो ,नूर निरन्तर नही,

उरां से उरां दुरा से दुरा ,हरि हिरदा के माही,

सपना में नार गमायो बालू ,जाग पड़ी जब वाही,

जाग्रत जोत जगे घट भीतर ,ज्यां देखूं वा सांई,

उगा भांण बीत गई रजनी ,हरि हम अंतर नाही,

ममता मेट मिलो मोहन से ,गुरां से गुरु ग़म पाई,

कहे बन्ना नाथ सुणो भाई ,संता अब कुछ धोखा नाही,

भजन गायक - चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी

89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।