जय दादी की बोल तू प्यारे संकट दूर भगाती है

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

जय दादी की बोल तू प्यारे संकट दूर भगाती है,

जो भी मंग पाठ सुनाये दादी सुन ने आती है,

जय दादी की बोल तू प्यारे ....

टंगत मची है सेठ जगत को नारायणी सेठानी है,

झुंझनू धाम की महिमा भगतो सारे जग ने मानी है,

जय दादी की जो भी गाये दादी गले लगाती है,

जो भी मंग पाठ सुनाये दादी सुन ने आती है,

जय दादी की बोल तू प्यारे ....

मंगल पाठ की महिमा थारी जो नित पाठ सुनाते है,

ान धन से है भंडार है भर्ती दादी किरपा पाते है,

हाथो हाथो ये पर्चा देने शक्ति रूप में आती है,.

जो भी मंग पाठ सुनाये दादी सुन ने आती है,

जय दादी की बोल तू प्यारे ....

सतयुग में श्री रानी सती का उचा नाम महान है,

निर्धन को धन देती दादी बांजन को संतान है,

कहे उल्म सत की ज्योत है घर घर सत लाइ है,

जो भी मंग पाठ सुनाये दादी सुन ने आती है,

जय दादी की बोल तू प्यारे ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।