हे रुणीचे रा राजा

पारंपरिक
माता लक्ष्मी भजन विविध भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

हे रुणीचे रा राजा थाने घनी रे घनी खम्मा ,

छपर फाड थे देवो बाकी राख ल्यो जम्मा ,

बाबा सगला नै थे बान्टो मेरो कराओ खर्चो,

मै भी तो नाच्तो आऊ म्हाने इसो दिखाओ पर्चो,

रुपिया गी घर आंगन मैं कराओ छम छमा छम्मा,

हे रुणीचे रा राजा,,,

थे देवता हो बाबा और देवता ही रहिजो ,

म्हारे घर मैं आन बिराजे थे लक्ष्मी जी नै कहिजो,

रुपिया सु माँ बापू खुश टाबरा री अम्मा ,

हे रुणीचे रा राजा ,,,,,

बाबा जद थारौ मेलो आवै सगला जावे म्हे देखा,

बाबा " आदिवाल "गै हाथा गी मिटाओ तंगी आली रेखा,

हर साल म्हे भी लगावा थारा जागरण जम्मा ,

हे रुणीचे रा राजा ,,,,,

लेखक रवि आदिवाल

संगीत nr beats

गायक रवि आदिवाल

सपना रिकॉर्ड राजस्थानी

8386854165

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।