मैं अपना मन हरि संग जोड़ूँ

संत रविदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं अपना मन हरि संग जोड़ूँ,

हरि संग जोड़ सबन संग तोडूं

मैं जहाँ जहाँ जाऊं तुम्हारी सेवा

तुमसा ठाकुर और ना देवा

सांची प्रीत जो तुम संग जोड़ी

तुम संग जोड़ सबन संग तोड़ी

मैं तीर्थ व्रत ना करूँ अन्देशा

तुम्हारे चरण कमल का भरोसा

मैं जहाँ जहाँ जाऊं तुम्हारी सेवा

तुम सा ठाकुर और ना देवा

मैं अपना मन हरि संग जोड़ूँ

हरि संग जोड़ सबन संग तोडूं

मन कर्म वचन तुम्हारी आशा

ऐसी भक्ति करे रैदासा

भजन गायक

(मनीष अनेजा जी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।