जिसके सिर ऊपर तू स्वामी सो दुःख कैसा पावे

गुरु नानक देव जी
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

बोल ना जाने माया मदमाता,

मरना चित ना आवे,

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

मेरे राम राये,तू संत का,संत तेरे,

तेरे सेवक को भय कुछ नाही,

जम नहीं आवे नेरे,

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

जो तेरे रंग राते स्वामी,

तिनका जनम-मरण दुःख नासा,

तेरे बगस ना मेटे कोई,सतगुरु का दिलासा,

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

नाम तेयायन सुख फल पायन,

आठ पहर अराधे,

तेरी शरण तेरे परवाह से,पांच दुष्ट लै सादे,

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

ज्ञान ध्यान कुछ करम ना जाना,सार ना जाना तेरे,

सबसे बड्डा सतगुरु नानक,जिन कलराखी मेरी,

जिसके सिर ऊपर तू स्वामी,

सो दुःख कैसा पावे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।