प्रभु के भजन में है कैसी शर्म

संत तुकाराम
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म,

मिला दे गा प्रभु से ये प्रभु का भजन,

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म,

शर्म छोड़ मीरा ने लिया है इक तारा,

द्रोपती ने छोड़ लजा प्रभु को पुकारा,

बड़ा ही दयालु है लेले शरण,

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म,

गणिका अजामिल को जिसने है तारा,

प्रह्लाद ध्रव को है जिसने है उबारा,

मिले गा तुझे भी वो लगाने लगन,

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म

नरसी तुकाराम भी थे ग्रहहस्ती चिंता न घर की न संसार की थी,

परेशानी प्रभु को थी होते मगन,

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म

प्रभु के भजन की है महिमा निराली,

बिना नाम जपके सब गए हाथ खाली,

नवरंग दुनिया ये झूठा ब्रम्ह ,

प्रभु के भजन में है कैसी शर्म

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।