मेरे सतगुरु बाबे नानक दा साढ़े पंज सो साल मना लिए

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

रल मिल सारे सेवा करके मीठी मीठी वाणी पड़ के,

मन चरना नाल ला लाइए ,

मेरे सतगुरु बाबे नानक दा साढ़े पंज सो साल मना लिए,

कर्मा वाली धरती जिथे पैर गुरा ने पाया,

तेरा तेरा तोल के सब नु सच दा पाठ पढ़ाया,

सुलतान पुर लोधी जाके जी धूड़ माथे नु ला लिए ,

मेरे सतगुरु बाबे नानक दा साढ़े पंज सो साल मना लिए,

पिता गुरा दा मेहता कालू माँ त्रिप्ता दा जाया,

खुशिया वंड दी बहिन नानकी रब है नेड़े आया,

प्रकाश गुरा दा करके जी पालकी साफ़ सजा लिये,

मेरे सतगुरु बाबे नानक दा साढ़े पंज सो साल मना लिए,

हथ जोड़ के इक दूजे नु संगता दें वधाई,

सतगुरु नानक परगट होये जग होइयाँ रुशनाइयाँ,

ढिलो माल दे सूखे वांगु दर ते शीश जुका लिए,

मेरे सतगुरु बाबे नानक दा साढ़े पंज सो साल मना लिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।