चलो चल रल मिल दर्शन कारिये

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

चलो चल रल मिल दर्शन कारिये सतगुरु नानक आये ने,

चलो चल भव सागर मिल तरिये कलयुग तारण आये ने,

सतगुरु नानक आये ने, सतगुरु नानक आये ने,

चलो चल रल मिल दर्शन कारिये सतगुरु नानक आये ने,

नानक आया नानक आया कल तारण गुरु नानक आया,

चीर हानीरा उपजिया इक नूर अवतार धारेया,

दसा नोहा दी किरत कर उस बाबे जग न तारेया,

चलो चल गुरा दा लड़ फड़िये जो कण कण विच समाये ने,

सतगुरु नानक आये ने, सतगुरु नानक आये ने,

चलो चल रल मिल दर्शन कारिये सतगुरु नानक आये ने,

सतगुरु खेड़ रचाया मेरा बाबा नानक आया,

सब के एक विचारिया उस वाणी नु उचारैया,

ओ सच्चा सौदा बोल्दा कर तेरा तेरा तोलदा,

सूरज नु पीठ विखा बाबा प् ठंडा पानी पाया,

चलो चल सत्संगत मिल तरिये के दुःख सारे दूर भगाये ने,

सतगुरु नानक आये ने, सतगुरु नानक आये ने,

चलो चल रल मिल दर्शन कारिये सतगुरु नानक आये ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।