बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दोहा: सदा पापी से पापी को तुम भव सिंदु तारी हो |

कश्ती मझधार में नैया को भी पल में उभारी हो ||

ना जाने कोन ऐसी भूल मेरे से हो गयी मैया |

तुमने अपने इस बालक को मैया मन से विसारी हो ||

बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया |

अपना मुझे बनाले ए मेहरों वाली मैया ||

दर्शन को मेरी अखियाँ कब से तरस रहीं हैं |

सावन के जैसे झर झर अखियाँ बरस रहीं हैं |

दर पे मुझे बुला ले, ए शेरों वाली मैया ||

आते हैं तेरे दर पे, दुनिया के नर और नारी |

सुनती हो सब की विनती, मेरी मैया शेरों वाली |

मुझ को दर्श दिखा दे, ए मेहरों वाली मैया ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।