कांगड़ा गढ़ चंगा पहाडा वाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देखो देखो यह शोभा महारानी की |

कांगड़े में जगमग ज्योति, यह शोभा महारानी की ||

कांगड़ा गढ़ चंगा, पहाडा वाली, कांगड़ा गढ़ चंगा |

हेठ वगे माई गंगा, कांगड़ा गढ़ चंगा ||

धरम-करम की ऐथे पौड़ी,

संगतां दर्शन करण नू दौड़ी |

ढक लिता सर नंगा, पहाडा वाली |

कांगड़ा गढ़ चंगा ||

डमरू वजदे छैनै खडकन,

आवन संगतां माँ नू परसन |

कर लिता मन चंगा, पहाडा वाली,

कांगड़ा गढ़ चंगा ||

लाल माँ, मन दी कट माँ जाली,

जिस विच बैठी मेहरां वाली |

चोला रंग-विरंगा, पहाडा वाली,

कांगड़ा गढ़ चंगा ||

ध्यानु भगत ने शीस चढ़ाया,

सनमुख माँ दा दर्शन पाया |

शर्मा माँ नाल रंगा, पहाडा वाली,

कांगड़ा गढ़ चंगा ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।