झुँझन वाली ने मैं आज पहनावा गजरो

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

झुँझन वाली ने मैं आज पहनावा गजरो,

पहरावा गजरो जी पहरावा गजरो,

झुँझन वाली ने...

चुन चुन कलियाँ भागा से मैं फुलवा तोड़ के लाया रे,

जे ऋ घोटो बांकड़ो गट हार बनाया रे,

झुँझन वाली ने....

यो अलबेलो गजरो महारी दादी के गल सोहे लो,

कोई भगता को मनड़ो गजरो घणो मोहे लो,

झुँझन वाली ने.......

ब्रह्मा विष्णु शंकर थारे गजरे माहि समाया रे,

सूरज चंदा तारा भी देखन ने आया रे,

झुँझन वाली ने

ई गजरे की शान निराली जाने दुनिया सारी रे,

नाच कूद कर मैं तो आज खुद रिजावा रे,

झुँझन वाली ने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।