जिधर देखूं जहाँ देखूं तेरा दीदार हो जाए

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॥ पावन पाठ ॥

बुत्तखाना और नसुए-हरम देख रहे हैं |

साईं सनम को सारे सनम देख रहें हैं ||

करम इतना तो मुझ पे, साईं जी एक बार हो जाए,

जिधर देखूं ,जहाँ देखूं, तेरा दीदार हो जाए |

मुझे दुनिया से क्या मतलब,

मुझे तुमपे भरोसा है |

जिसे साईं नवाजे,

उसका बेडा पार हो जाए ||

गदाई आप के दर की,

शहंशाहों से बढ कर हैं |

अगर ये ही गुलामी है,

तो यह हर बार हो जाए ||

ना कोई इनके जैसा है,

फ़कीर साईं तो ऐसा है |

जो साईं रंग में रंग जाए,

तो पा-किर्दार हो जाए ||

लगादी जान की बाज़ी,

जो होगा देखा जाएगा |

साईं की जीत हो जाए,

हमारी हार हो जाए ||

हरेक मज़हब को साईं ने,

मोहोबत्त ही सिखाई है |

भरोसा साईं पे करले,

तो जय जयकार जो जाय ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।