दादी जी के हाथ रचाई जी या मेहँदी

पारंपरिक
माता लक्ष्मी भजन रानी सती दादी भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

सर्ब सुहागन मिल मंदिर में आई,

दादी जी के हाथ रचाई जी या मेहँदी ,

सोने की झारी में गंगा जल लाइ,

कंचन थाल घुलाई जी या मेहँदी ,

कोई सुवरण थाल घुलाई जी या मेहँदी,

चाँदी की चौंकी पे चौक पुरायो दादी जी बैठ मनाई जी या मेहँदी,

भाव भरी मैंने हाथ रांची दादी जी ने बहुत ही प्यारी जी या मेहँदी,

चरण धोये चरना में लागि आशीष लेकर घर आई जी या मेहँदी,

आन धन लक्ष्मी बहुत घना दे टाबरिया रे प्रेम बड़ाई जी या मेहँदी,

दया दृष्टि कर दो दादी जी टाबरियां मिल कर गाई जी या मेहँदी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।