भक्तो के प्यारे दुनिया के सहारे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

भव सागर से पार है जाना, बंदे रब का दर्शन पाना,

ॐ साईं नाथ जप ले, ॐ साईं नाथ जप ले |

भक्तो के प्यारे, दुनिया के सहारे,

जो सब के काम सवारे, दुखियो के कष्ट निवारे,

वो साईं नाथ है, हर जगह मेरे साथ है |

पत्थर जो छू ले बाबा, सोना कर देते हैं |

रोगीओ के रोग सारे, आप हर लेते हैं ||

जो डूब रहा है मझदारे, वो मुख से साईं पुकारे, उसे आप लगते पार हैं,

वो साईं नाथ है, हर जगह मेरे साथ है ||

साईं की निगाह में कोई, ऊँचा नाही नीचा है |

एक ही मिटटी से सारी बगिया से सींचा है ||

धरती पे फुल जो सारे , अम्बर के सभी सारे सितारे, है जिन पे सभी बलिहारे,

वो साईं नाथ है, हर जगह मेरे साथ हैं ||

सारे जगत के बाबा साईं दयावान हैं |

एक ही सब के मालिक, एक भगवान् हैं ||

ए मेरे सतगुरु प्यारे, ए मेरे अल्ला प्यारे, कहे सब के राम दुलारे,

वो साईं नाथ हैं, हर जगह मेरे साथ हैं ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।