साई रस की घुट मनवा पी ले रे

पारंपरिक
माता लक्ष्मी भजन साईं भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

साई रस की घुट मनवा पी ले रे,

तेरी जिंदगी युही तर जायेगी,

मल्सापति की तर गई कात्या की भी तर गई,

लक्ष्मी माई को नो सिक्के नो नहीं फिर मिले,

साई रस की घुट मनवा पी ले रे

सूंदर काया तू देख लुभाया तू गरब करे तन का,

जल गई देह बिखर गई काय जो माला मन का,

तुम ही तारोगे पार उतारो गे,

किसी और के दर न हम जाए,

साई रस की घुट मनवा पी ले रे,

तुमने बांटी किसी को भभूति किसी को तुम ने तोफा दियां,

किस्मत वालो से ही तुम्हने अपना चरण छुवाया.

हम वेचारे है गम के मारे है,

हम शिरडी गांव में आये हुए है

साई रस की घुट मनवा पी ले रे,

सुनलो साई गरीब की दुहाई गिरा हु माया जालो में,

झूठी दुनिया झूठे रिश्ते झूठे जन जालो में मन अभिलाषी है भोगभिलाषी है,

साई भक्ति दो मन रम जाए,

साई रस की घुट मनवा पी ले रे,

साई तेरे है लाखो दीवाने सुनाने तुझे आये है,

भाग किसी का फूटा कोई दुनिया से है रूठा,

शिरडी आये है आशा लाये है,

साई दे दर्शन गम छट जाए ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।