प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

जान मीरा की ना राणा ले सका

ज़हर भेजे थे तो अमृत बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

भाट नरसिंह भक्त का तुमने भरा

वृंदावन के सेठ श्यामल बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेम से परिपूर्ण जिसने दिल दिया

बिक गए बिन दाम चाकर बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

भाव तुलसीदास का पूरा किया

मुरली छोड़ के धनुषधारी बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।