कौन ठगवा नगरीय लूटल हो

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो ||

चन्दन काठ के बनल खटोला,

ता पर दुलहिन सूतल हो,

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो |

उठो सखी री मांग संवारो,

दूल्हा मोसे रूठल हो,

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो |

आये जमराजा पलंग चढ़ी बैठा,

नैनन अंसुआ छूटल हो,

कौन ठगवा नगरीय लूटल हो |

चार जने मिल खाट उठायी,

चहुँ दिस भम भम उठल हो,

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो |

कहत कबीर सुनो भाई साधो,

जग से नाता छूटल हो,

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो |

रचयिता - कबीर दास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।