साईं साईं जप बंदे क्यूं भक्ति से मुख मोड़ा है

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

साईं साईं जप बंदे, क्यूं भक्ति से मुख मोड़ा है |

कर ले साईं की भक्ति, रह गया यह जीवन थोडा है ||

चार दिन की बाकी है बंदे तेरी कहानी, सपनो से जागेगी कब तक तेरी जवानी |

जप साईं का नाम रे बन जायेगे काम रे, एक बार जप ले एक बार ||

उसकी कश्ती पार हुई, जिस ने भी नाता जोड़ा है |

कर ले साईं की भक्ति, रह गया यह जीवन थोडा है ||

मोह माया के बंधन भक्ति ना करने देंगे, संतो की संगति में चौंकी न भरने देंगे |

पल पल बीता जाए रे, यूँ ही समय गवाए रे, एक बार, जप ले एक बार ||

सिर पे आके काल खड़ा, इसे साईं ने ही मोड़ा है |

कर ले साईं की भक्ति, रह गया यह जीवन थोडा है ||

साईं जी की आखों में भक्ति का है खजाना, जिस ने भी की भक्ति उसपर ही लुटाना |

साईं राम गा ले रे, साईं श्याम पा ले, एक बार जप के एक बार ||

कमलिन तेरे चरणों से साईं जी नाता जोड़ा है |

कर ले साईं की भक्ति, रह गया यह जीवन थोडा है ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।