गुरु जी जीवन-जहजवा भव से दिहिं उतार

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हाँथ जोड़ के विनती करीं,अर्जी सुनी हमार,

गुरु जी जीवन-जहजवा भव से दिहिं उतार |

रउरा चरनिया में सब सुख पाईं,

रउरा भरोसे हम जिंदगी बिताईं |

रखले रहम अपना शरणिया,ना देहम बिसार,

गुरु जी जीवन-जहजवा भव से दिहिं उतार |

दर्शन राउर पाके गुरूजी अँखियाँ जुड़ाला,

भागे ला अन्हरिया,अंदर अंजोर होई जाला |

रउरे किरपा से हम देखनी अंदर में भगवान,

गुरु जी जीवन-जहजवा भव से दिहिं उतार |

हाँथ जोड़ के विनती करीं,अर्जी सुनी हमार,

गुरु जी जीवन-जहजवा भव से दिहिं उतार |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।