ॐ जय लक्ष्मी रमना

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमना, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

सत्य नारायण स्वामी, जन पातक हरणा, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे

नारद करत निरंतर, घंटा ध्वनि बाजे, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

प्रगट भए कलि कारण, द्विज को दरश दियो

बूढो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

दुर्बल भील कराल जिन पर कृपा करी

चंद्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दिनी

सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्ही, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो

श्रद्धा धारण किन्ही तिनको काज सरयो, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करी

मन वांछित फल दीन्हो, दीन दयाल हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

चढ़त प्रसाद सवायो कदली फल मेवा

धूप दीप तुलसी से राजी सत्यदेव, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे

तन मन सुख सम्पति, मन वांक्षित फल पावे, ॐ जय लक्ष्मी रमना...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।