तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से,

वृन्दावन जाने से बरसाना से ।

तकदीर बदल जाती है वृन्दावन जाने से,

तकदीर बदल जाती है बरसाना जाने से ॥

ऊँची अटारी श्री राधा जी का मंदिर है,

जाके जाना बताना प्यारे ओ भी तेरे अंदर है ।

मन हल्का होता है उनको बतलाने से,

तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से ॥

तेरी सारी विपदाएँ टारेगे बिहारी जी,

प्रेम से कहना के मैं हूँ तिहारी जी ।

जादू सा कर देंगे तेरे सन्मुख जाने से,

तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से ॥

सूरदास और कबीर की भी बदली,

रसखान जैसे फ़कीर की भी बदली ।

मदमस्त हुई मीरा गिरिधर गुण गाने से,

तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से ॥

मानो या ना मनो यह तो अपना विचार है,

दास का तो काम राधा नाम प्रचार है ।

‘हरी दासी’ ने पाया गुरुदेव बताने से,

फिर क्या फ़ायदा होगा पीछे पछताने से,

तेरी बिगड़ी बनेगी वृन्दावन जाने से ॥

स्वर अवं कवि : हैप्पी शर्मा (हरी दासी फगवाड़ा)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।