इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द गोविन्द केहन्दा

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द गोविन्द केहन्दा,

जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं पैंदा ।

नारद जी इक तारा ले के सारी दुनिया तारी,

सात दीप नव खण्ड में गाई प्रभु की महिमा भारी ।

जो कोई हरी को नाम ना सुमिरे,

जो कोई राधा नाम ना सुंमिरे, विच्च नर्का दे पैंदा ॥

इक तारा वाजदा जी...

इक तारा नरसी दा वजेया, आ गए कृष्णा मुरारी,

द्वारिका दे विच्च अपने हत्थी आ के हुंडई तारी ।

कष्ट कटे जो सच्चे मन नाल नाम हरी दा लैंदा ॥

इक तारा वाजदा जी...

इक तारा ले मीरा बाई गिरिधर गिरिधर गाया,

जहर प्याले दे विच मीरा श्याम दा दर्शन पाया ।

‘हरी दासी’ ओह बाह फड़ लैंदा, जेहड़ा दुःख ओहदे लयी सेहंदा ॥

इक तारा वाजदा जी...

इक तारा फिर श्री हरिदास जी निधिवन विच्च बजाया,

युगल छवि चो बांके बिहारी अध्बुत रूप बनाया ।

सुख पावे जो सन्मुख बह के राधे राधे केहन्दा ॥

इक तारा वाजदा जी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।