किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है,

भोले ओ शंकर भोले मनवा कभी न डोले,

नस नस में जो तू वसा है,

किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है,

कैसा नशा ओ भोले उरते कभी न,

तेरी मस्ती में जीता ॐ प्याला पीता,

तेरा ये मस्त कलंदर तेरी भगति में रहता,

तेरा नशा ओ भोले मेरे सिर चढ़ कर बोले,

मस्ती का अपना मजा है,

किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है,

तेरे भक्त भक्त रहे मस्त मस्त,

नाम तेरे का रोगी भोला में भोला योगी,

एक दिन ये जींदडी भोले नाम तेरे ही होगी,

जब भी मैं जयदा सोया तेरी ही धुन में खोया बस नाम तेरा ही जपा है,

किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है,

सचिन बांगड़ को भोले चढ़ गई है तेरी खुमारी,

होश न आये उसको भुला ये दुनिया सारी,

राजू पंजाबी गाये दिल में तू वस् गया हाये,

बिन तेरे जी न सजा है,

किसी को भांग का नशा है मुझे तेरा नशा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।