भोले शंकर दी भांग वाली मस्ती चढ़ गी,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर दे रंग निराले,

ताहियो शिव नु पूजन सारे,

पे के भांग प्याले सारे भंग ऐसा कुछ कर गई,

भोले शंकर दी भांग वाली मस्ती चढ़ गी,

भोले शंकर दी नाम वाली मस्ती चढ़ गी,

गल विच फनियर पाया उस ने,

तन ते भसम रमाया उस ने,

मथे चन सजाया उस ने जटा च गंगा वग दी,

भोले शंकर दी भांग वाली मस्ती चढ़ गी,

जेहड़े शिव दर हाज़री भर दे,

ओहना दे शिव दुखड़े हरदे,

ऐसी कर्म नवाजी करदे मेहर रखन हर घर दी,

भोले शंकर दी भांग वाली मस्ती चढ़ गी,

शिव शंकर दा रूप निराला,

आखे रिंकू डंडा वाला,

मिनी सलीम दे वांगु सब भगता दी झोली भरदी,

भोले शंकर दी भांग वाली मस्ती चढ़ गी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।