योगी रूप रब दा

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पहला गुरा नु ध्यावा मैं,

श्री रविंदर गिरी गुरु राज जी,

तहनु शीश झुकाव मैं,

मैनु बाबा जी दा ज्ञान दीजो,

संगता च गावा महिमा,

गुरु जी ऐसा वरदान दीजियो,

जह्नु शंकर जी ने वर दिता सी,

बारा साल उम्र किती सब कुछ अपना ही कर दिता सी,

जूनागढ़ अवतार होया,

माता लक्ष्मी पिता विष्णु कर भोले दा अवतार होया

शाहतलाइयाँ दे भी भाग जग गए,

जिथे जोगी पेर रखे उस था उते मेले लग गये,

माता रत्नो दा पाली है,

लस्सी रोटी मोड़न वाला सारे जग दा ही बाली है

लाइया मोरा ते उधारियां जी,

गोरख दा मान तोड्या महरा गुरा दियां सारियां सी

सिर सज दियां बाँवरियाँ,

चंन जेहा मुख देख के लखा तपदीयां रुहा ठारिया,

योगी दिला दियां जान दा है,

ओह्दी बांह जरूर फड़ दा,.

खाख रहा दियां जो झाड़ दा है,

डयोट गुफा विच नाथ वसदा,

सच्ची मुचि रूप रब दा पाली उनहे वाला सच दसदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।