लक्ष्मण सा भाई हो कोशाल्याँ माई हो

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मण सा भाई हो कोशाल्याँ माई हो,

स्वामी तुम जैसा मेरा रघुराई हो.

नगरी हो अयोय्ध्या सी रघु कुल सा यारना हो,

चरण हो राघव के यहाँ मेरा ठिकाना हो,

हो त्याग भरत जैसा सीता सी नारी हो,

लव कुछ के जैसी सन्तान हमारी हो,

श्रधा हो श्रवन जैसी शबरी सी भक्ति हो,

हनुमत के जैसे निष्ठा और शक्ति हो,

मेरी जीवन नैया हो प्रभु राम खावियाँ हो,

राम किरपा की सदा मेरे सिर पे छईया हो,

सरयु का किनारा हो निर्मल जल धारा हो,

दर्श मुझे भगवन जिस घडी तुम्हारा हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।