बजी श्याम की बाँसुरिया

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बजी श्याम की बाँसुरिया बाँसुरिया बाँसुरिया

हाय राम बजी कहाँ श्याम की बाँसुरिया

ओ बजी श्याम की बाँसुरिया ..............

ब्रह्मा भूले विष्णु भूले भूले नारद ज्ञानी

तप करना कैलाश पे भूले भोले औघड़ दानी

हो भूले भांग की गठरिया गठरिया गठरिया

हाय राम बजी कहाँ श्याम की बाँसुरिया

मौन हुए पंछीगण सारे गाय चरन बिसराई

जमुना जी की धरा रुक गयी ऐसी तान सुनाई

ओ बैठे डाल पे सांवरिया सांवरिया सांवरिया

हाय राम बजी कहाँ श्याम की बाँसुरिया

दूध दही बेचन को ग्वालन मथुरा जा नहीं पाई

कृष्ण कन्हैया मुरली वाले ऐसी तान सुनाई

ओ भूली राह में गुजरिया गुजरिया गुजरिया

हाय राम बजी कहाँ श्याम की बाँसुरिया

राधा के संग कृष्ण कन्हाई हिलमिल रास रचाये

वो छवि देखन को फिर शर्मा मन ही मन ललचाये

ओ तरसे नैनो की पुतरिया पुतरिया पुतरिया

हाय राम बजी कहाँ श्याम की बाँसुरिया

बजी श्याम की बाँसुरिया ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।