सूर्ये पुत्र है शनिदेवता

पारंपरिक
शनि देव भजन शनि देव भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

सूर्ये पुत्र है शनिदेवता जिनकी निराली जग में बड़ी शान,

गुड तिल तेल से इन्हें जो पूजे देते उन्हें मंवांचित ये वरदान,

संकट के बादल सिर पे छा जाये तो मत गबराना,

श्रधा भाव और मन में धीर धर शनि देव की शरण में आना,

दुःख संकट पल में हर लेंगे विपद्वा का ये कर देंगे निधान,

गुड तिल तेल से इन्हें जो पूजे देते उन्हें मंवांचित ये वरदान,

बहित न करते कभी किसी का शनि देव है ऐसे किरपालु,

सब के बिगड़ी काम बना दे दया के सागर बड़े दयालु,

शोक मुक्त करके भगतो को समपंता करेगे उसे प्रधान

सूर्ये पुत्र है शनिदेवता जिनकी निराली जग में बड़ी शान

शनि देव की कथा की महिमा जग में कितनी पावन है,

सांचे या इसे श्रवण करे जो मुक्त करे आवन जावन से,

हो भरपूर हुए वेह तावता में शनि देव करे एसा कल्याण,

गुड तिल तेल से इन्हें जो पूजे देते उन्हें मंवांचित ये वरदान,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।