जटा से श्री गंगा बेहती

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

त्रिपुरारी वृषभ की सवारी जटा से श्री गंगा बेहती,

जटा से श्री गंगा बेहती जटा से श्री गंगा बेहती,

जिसने सागर का सारा विष पी लिया,

बन के किरात अर्जुन को वर दे दिया,

भागम धारी वैकुण्ठ के पुजारी,

जटा से श्री गंगा बेहती.......

नितय तांडव करते है नटराज शिव,

रुदर बन कर करते है संहार शिव,

करते है पूजा शिव के जैसा न दूजा,

जटा से श्री गंगा बेहती......

रहते पर्वत पे बिना घर द्वार के,

मिले लोहित दिगंबर निराकार ये,

त्रिपुरारी विशश्वर जटा धारी,

जटा से श्री गंगा बेहती,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।