लीले घोड़े रा असवार | रुणिचा बाबा रामदेव भजन

सौरभ मधुकर
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

लीले घोड़े रा असवार

करां थारी मनवार

बाबा म्हारे घरां आवो जी

आवो न बाबा,म्हारे घरां आवो जी

काना में थारे कुण्डल सोहे

गल बैजंती माला

सिर पर थारे मुकुट बिराजे

नैन लगे मतवाला

सोभा वरणी न जाय

देख्या मन हर्षाय

बाबा म्हारे घरां आवो जी

आवो न बाबा,म्हारे घरां आवो जी

पीरा का थे पीर कहाओ

अजमल घर अवतारी

महिमा थारी भारी बाबा

पूजे दुनिया सारी

म्हे भी धरां थारो ध्यान

गावां थारो ही गुणगान

बाबा म्हारे घरां आवो जी

आवो न बाबा,म्हारे घरां आवो जी

आंधनलया ने आंख्या देओ

पांगल्या ने पाँव

कोढ्या का थे कोढ़ मिटाओ

जाने सकल जहान

म्हे तो अर्जी करां हमेश

हरज्यो सारा कष्ट कलेश

बाबा म्हारे घरां आवो जी

आवो न बाबा,म्हारे घरां आवो जी

लीले घोड़े रा असवार

करां थारी मनवार

बाबा म्हारे घरां आवो जी

आवो न बाबा,म्हारे घरां आवो जी

संपर्क - 09831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।