बाबा जी मेरी आस ना तोड़ो

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी मेरी आस ना तोड़ो |

बाबा जी विशवास ना तोड़ो ||

आस ना तोड़ो विशवास ना तोड़ो |

छोडो ना मझधार ||

सारे जग से नाता तोडा |

मैंने नाता तुम से जोड़ा ||

बीच भवर मे है मेरी नैया |

कर दो बेडा पार ||

छोड़ तेरा दर किस दर जाऊं |

किस को अपना हाल सुनाऊं ||

सब की सुनने वाले बाबा |

सुन मेरी फ़रिआद ||

शरणागत की लाज बचाओ |

मुझ को अपने गले लगाओ ||

मानसागर को दर्श दिखाओ |

हो के मोर सवार ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।