भोले नाथ चले गोरा रानी को बिहाणे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले नाथ चले गोरा रानी को बिहाणे,

मस्ती में आज लगे डमरू बजाने,

भोले नाथ ने खेल रचाया , नंदी गण को बैल बनाएं,

ना भोले ने गेहणा पहना , ना ही सर पर मुकुट सजाया,

सारे तन पर भस्म रमाया , झोली को कांदे लटकाया ,

गले में सर्पों की माला , बुड्ढा बाबा बन कर आया,

लंबी लंबी दाढ़ी को , लगा वो खुज लाने,

भोले नाथ चले .........

कैसा दूल्हा कैसे साथी ,नंग मलंग है सभी बराती,

ना कोई रथ ना कोई पालकी , ना संग लाए घोड़े हाथी,

अरे नाचे गाये उड़ाये माटी , हाथ में पकड़े डंडे लाठी,

अरे घोट-घोट भांग है पीते , खाए धतूरा भर भर भाटी,

भोले नाथ चले ...........

जब गोरा की सखियां आई , देख दूल्हा वो घबराई ,

दौड़ी दौड़ी गई महल को , जाके सारी बात सुनाई,

बात सुनी गोरा मुस्काई , यह सारे जग का साईं,

यह सब भोले की माया , तुम माया को समझ ना पाई,

वह तो आए मेरे कर्मों को चमकाने ...

भोले नाथ चले गोरा रानी को बिहाणे ,

मस्ती में आज लगे डमरु बजाने ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।