ना रोवे ज्योत पे आवे गे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना रोवे ज्योत पे आवे गे वो पवनसुत हनुमान सखी,

रोवे न तू धीरज धरले संकट मोचन हार वही,

जग रखवाला अंजनी लाला सब की सुने पुकार वही,

उन्हें सब भगता का ध्यान रे सखी,

ना रोवे ज्योत पे आवे गे वो पवनसुत हनुमान सखी,

राम दुलारे अंजनी प्यारे ना भगतो से दूर रहे,

राम ही राम पुकारे वो तो भगति के में चूर रहे,

उन्हें सारा है अनुमान रे सखी,

ना रोवे ज्योत पे आवे गे......

वो बलकारी जाने सारे आके संकट काटेगा,

माया न्यारा हो वो नाकारी गुण अवगुण ने छाते गा,

वो मुख से करवाऐ व्यान रे सखी,

ना रोवे ज्योत पे आवे गे ...............

हे खुखर बोले मनवा ढोले ध्यान ठिकाने तेरा ना,

सुन उस दिन से सच्चे मन से तेरा बाला जी तेरा नाम,

अशोक धना नादान रे सखी,

ना रोवे ज्योत पे आवे गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।