चलो द्वार चले मिल के हमे साई ने भुलाया है

पारंपरिक
सूर्य देव भजन साईं भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

तकदीर बदल ती है रेहमत से फकीरो की,

चलो द्वार चले मिल के हमे साई ने भुलाया है,

कण कण में साई जी तेरा रूप समाया है,

फर्याद सुनाने को मेरा दिल कर आया है,

तेरे रूप हज़ारो है सब में तेरी छाया है,

हर रंग में खुशबू तेरी तेरी ही ये माया है,

तेरे अधर ने साई तुझे गा गा के भुलाया है,

रवि चन्दर ने भी बाबा तेरा दर्शन पाया है ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।