ऐसी सुबह ना आए, आए ना ऐसी श्याम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव है शक्ति, शिव है भक्ति, शिव है मुक्ति धाम

शिव है ब्रह्मा, शिव है विष्णु, शिव है मेरा राम

ऐसी सुबह ना आए, आए ना ऐसी श्याम

जिस दिन जुबा पे मेरी आए ना शिव का नाम

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

मन मंदिर में वास है तेरा, तेरी छवि बसाई

प्यासी आत्मा बनके जोगन, तेरी शरण में आई

तेरी ही शरण में पाया, मैंने यह विश्राम

ऐसी सुबह ना आए...

तेरी खोज में ना जेने, कितने युग मेरे बीते

अंत में काम क्रोध मद हारे, हे भोले तुम जीते

मुक्त किया तूने प्रभु मुझको, शत शत है प्रणाम

ऐसी सुबह ना आए...

सर्व कला संम्पन तुम्ही हो. हे मेरे परमेश्वर

दर्शन देकर धन्य करो अब, हे त्रिनेत्र महेश्वर

भाव सागर से तर जाउंगी, लेकर तेरा नाम

ऐसी सुबह ना आए...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।