कण कण में जो रमने वाला घट घट में समाया है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कण कण में जो रमने वाला घट घट में समाया है जिसका नाम,

त्रेता के है विष्णु अवतरण दसरथ सूत है सिया पति श्री राम,

अंत बुरे का बुरा हुआ है प्रभु ने सबको ये समझाया,

अदा शक्ति के स्वामी है फिर भी मर्यादा में जीना सिखाया,

चला है जो श्री राम के पथ पर अंत मिला उसको प्रम धाम,

त्रेता के है विष्णु अवतरण दसरथ सूत है सिया पति श्री राम,

मात पिता को जिसने भाव से जीवन में समान दिया,

उनकी आज्ञा शीश धरी और उनके वचन का मान किया,

लख चौरासी पार हुआ वो मिला सुगमता से मोक्ष धाम,

त्रेता के है विष्णु अवतरण दसरथ सूत है सिया पति श्री राम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।