ओ कुटिया वाले बालाजी तेरा हो गया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आया जब से दर पे जाने क्या हो गया,

ओ कुटिया वाले बालाजी तेरा हो गया

कुटिया वाले बाला जी की अज़ब शान है,

जो भी देखे वही इन पे कुर्बान है,

इनकी भक्ति का मुझपे नशा छा गया,

ओ कुटिया वाले बालाजी तेरा हो गया

जब से कुटियां वाले बाला तेरी भक्ति मिली सुने मन की बाला जी मेरी कलियाँ खिली,

जो न सोचा कभी वही हो गया,

ओ कुटिया वाले बालाजी तेरा हो गया

मंगल वार शानि वार को जो दर पे आये सिंदूर चढ़ाये और भोग लगाए,

मिठू बाला की किरपा से संकट दूर हो गया,

ओ कुटिया वाले बालाजी तेरा हो गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।