बाला मैं बैरागन हूंगी

मीरा बाई
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॥ पावन पाठ ॥

बाला मैं बैरागन हूंगी - २

जिन भेषा मेरो साहब रीझे

सोहि भेष धरूंगी

बाला मैं बैरागन हूंगी

कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा

कहो तो भगवा भेष

कहो तो मोतियन मांग भरावा

कहो छिटकावा केश

बाला मैं बैरागन हूंगी

प्राण हमारा वह बसत है

यहाँ तो खाली खोड़

मात पिता परिवार सहूँ है

कही ये दिन का तोड़

बाला मैं बैरागन हूंगी

बाला मैं बैरागन हूंगी - २

जिन भेषा मेरो साहब रीझे

सोहि भेष धरूंगी

बाला मैं बैरागन हूंगी

स्वर - वाणी जयराम

संगीत - पंडित रवि शंकर

फिल्म - मीरा बाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।