इक निक्का जेहा जोगी घर रतनो दे आया

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चलो जाके दर्शन पाइये सुट्टी तकदीर जगाइये,

ओहदे मुख ते नूरी लाही है मेरा वेख के मन हरषाया,

इक निक्का जेहा जोगी घर रतनो दे आया,

ओह दे बगल चोली पाई है,तन उते भस्म रमाई है,

रतनो दे भूहे अगे आ योगी ने अलख जगाई है,

ओ नाम शिवा दा जपदा है धुना हेठ बोड दे लाया

इक निक्का जेहा जोगी घर रतनो दे आया,

सिर उते जटा सुनहरी है पैरा विच पहुये सजदे ने,+

हथ चिमटा गल विच सिंघी ने आया दुःख क्तन नु जग दे ने,

बन खण्डी गौआँ चार दा है अनोखी इसदि माया,

इक निक्का जेहा जोगी घर रतनो दे आया,

लिखे अख़बार पूरी लिखारी है,

जोगी कलयुग दा अवतारी है सजन भी तर यु लग चरनी,

जस्सी तर गई रोपड़ वाली है,.

किती किरपा पौणाहारी ने नाम दुनिया विच चमकाया,

इक निक्का जेहा जोगी घर रतनो दे आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।