नन्दलाल फड़ेया गया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चोरी दूध दही मखन दी करदा नन्दलाल फड़ेया गया

फड़ेया गया नि फड़ेया गया नन्द दा लाल फड़ेया गया,

चोरी चोरी घर गोपियाँ दे वड दा नन्दलाल फड़ेया गया

निक्का हुंदा गोपिया दे घर चला जन्दा सी,

मुरली ब्जाउन्दा नाले रास रचाओंदा सी,

नि स्वाद ले ले मखन खावे नाले भेद ले आवे उस घर दा,

चोरी दूध दही मखन दी करदा नन्दलाल फड़ेया गया

ताने ने मार दिल गोपियाँ ने साडेया,

कई वार मार रिया ते कई वार तारेया,

नि ताहने मेहने मार कुट्दी ओह ता जरा भी न परवाह करदा,

नन्द लाल फ्ड़ेया गेया

चोरी दूध दही मखन दी करदा नन्दलाल फड़ेया गया,

राधा नाल गोपिया ने लाया नाका गाव दा,

फड लिया चोर सिर मोर श्याम संवारा,

नि पूछ गिश किती गोपियाँ पहला ना नु रह करदा,

नन्द लाल फ्ड़ेया गेया

चोरी दूध दही मखन दी करदा नन्दलाल फड़ेया गया,

मधुप हरी नु जद गोपियाँ डराया सी,

नटखट छलिया जरा न गब्राया सी,

नि हस हस कहन लगा मैं ता बाल लीला पया सी करदा,

नन्द लाल फ्ड़ेया गेया

चोरी दूध दही मखन दी करदा नन्दलाल फड़ेया गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।