वाह रे वाह घोटे वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वाह रे वाह घोटे वाले तेरा है खेल निराले,

जिस ने संसार सम्बाला उसकी तू नाव सम्बाले,

भगती है तेरा गहना तेरे बल का क्या कहना,

कर दो न जीवन हमने तेरे हवाले,

वाह रे वाह घोटे वाले तेरा है खेल निराले,

ढूंड रहे थे मात सिया को वन में जब रघुराई,

तू ही उनका बना था सहाई,

सात समुंदर लांग के सीता माँ की खबर लगाई.

लंका रावन की तुम ने जलाई,

सारे जग में कोई कर जो पाया नही,

वो काम को तूने हनुमत पल में कर डाले,

वाह रे वाह घोटे वाले तेरा है खेल निराले,

शक्ति लागी लक्ष्मण को और मुर्शा भारी छाई,

तब रोने लगे रघुराई,

सूरज उगने से पहले संजीवन लाये पिलाये,

तूने राम की लाज बचाई,

राम जी पे बड़ा तेरा कर्ज चडा,

हो भारी से भारी संकट तूने ही टाले,

वाह रे वाह घोटे वाले तेरा है खेल निराले,

भरी सबा में तूने अपनी छाती चीर दिखाई,

छवि राम की जिस में समाई,

सची भक्ति और सेवा की घर घर ज्योत जगाई,

देवो ने तेरी महिमा देवो ने गाई,

बाला तुम सा कोई देव दूजा नही,

सोनू क्या बोले कहते ये दुनिया वाले,

वाह रे वाह घोटे वाले तेरा है खेल निराले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।