कान्हा यमुना किनारे आजा रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा यमुना किनारे आजा रे भुलाये राधा प्यारी,

मैंने गाऊ चराने जाना कैसे आउ राधा प्यारी,

कान्हा यमुना किनारे आजा रे भुलाये राधा प्यारी,

आज ना तू आया फिर बड़ा पश्तायेगा,

मिंते करेगा चाहे तू गिड़गिड़ाए गा,

मैं न आउंगी तेरे भुलाने पे सुन ले श्याम बिहारी,

मैंने गाऊ चराने जाना कैसे आउ राधा प्यारी,

कान्हा यमुना किनारे आजा रे भुलाये राधा प्यारी,

ऐसे ना तुम रूठो राधे अपने प्यारे श्याम से,

विनती करू राधा तेरी सुन ले जरा ध्यान से,

ऐसे दिल को न तोड़ो तुम मेरी राधा प्यारी,

कान्हा यमुना किनारे आजा रे भुलाये राधा प्यारी,

कान्हा तेरी प्रेम दीवानी है ये प्यारी राधा,

राधा के मन में श्याम है वस्ते श्याम के मन में राधा,

राधा कृष्ण है कृष्ण है राधा ये क्यों बात विसारी,

कान्हा यमुना किनारे आजा रे भुलाये राधा प्यारी,

यमुना किनारे अब आये है बिहारी,

छम छम नाचे राधा प्यारी,

आ गाये बिहारी जी आ गाये बिहारी,

तो से मिलन को आये है बिहारी,

भूल कर दुनिया सारी,

सुन राधा प्यारी सुन राधा प्यारी,

मुझे मेरे कान्हा की दुल्हन बना दो,

आओ सखियों मुझे मेहँदी लगा दो,

बंसी की सरगम कहे राधा राधा मुझ बिन आधी मैं तुझबीण आधा,

ओ मेरी राधा ओ मेरी राधा,

रास रचेगे ब्रिज में भारी याद करे गी दुनिया सारी,

जय राधे मुरारी जय राधे मुरारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।