माता यशोदा दुंड रही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माता यशोदा दुंड रही छुपे हो कहा पे माखन चोर छुपे हो कहा पे माखन चोर,

यही बस सब से पूछ रही छुपे हो कहा पे नंदकिशोर,

छुप कर कान्हा माखन खाये माता यशोदा को नजर न आये,

जोर से फिर आवाज लगाये पर वो उसको ढूंड ना पाये,

गली में आवाजे गूंज रही मचा है सारे मोहले में शोर,

माता यशोदा दुंड रही.....

नजर पड़ी जब कान्हा पर पीछे दोडी यशोदा माई,

पकड़ लिया नन्हे नटखट को करने लगी कान्हा की पिटाई,

लगी बाँधन वो कान्हा को पर न बंधा लगा लिया जोर,

माता यशोदा दुंड रही.........

अखिर जब वो बाँध ना पाये,मंद मंद कान्हा मुश्काये

बोली यशोदा मुह खोलो तो मुह में सारा ब्रह्मांड दिखाये.

यशोदा हाथो को जोड़ खड़ी करदो माफ़ मुझे चीतचोर,

माता यशोदा दुंड रही.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।