देना हो तो झुंझनवाली दे इतना वरदान

सौरभ मधुकर
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

देना हो तो झुंझनवाली दे इतना वरदान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

नमो नारायणी... नमो नारायणी...

नमो नारायणी... नमो नारायणी...

खो जाऊं जब पांच तत्त्व में,

हो वो झुंझनू धाम...

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

नमो नारायणी... नमो नारायणी...

नमो नारायणी... नमो नारायणी...

बिन मांगे सब कुछ देकर दया दिखाई है दादी

पल-पल साथ मेरा देकर लाज बचाई है दादी

एक नहीं लाखो मुझपर है तेरा एहसान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

नाम तुम्हारा ले लेकर हुआ मुझे एहसास यही

खुश रहता है भगत तेरा

रहता कभी उदास नही

नाम तुम्हारा कर देता हर मुश्किल आसान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

जिस दिन निकले प्राण मेरा

सामने हो तस्वीर तेरी

मुख पर तेरा नाम हो

लिख ऐसी तक़दीर मेरी

दादी अपने सेवक का कर इतना सा काम

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

नमो नारायणी....नमो नारायणी....

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।