मेरी नजरे तेरी नजरो को निहारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी नजरे तेरी नजरो को निहारे जाती है,

के कब मिलोगे सँवारे पूछे जाती है,

मेरी नजरे तेरी नजरो को...

अपनों ने कर दियां है श्याम मुझको अनजाना,

तुम्ही अपने बन जाओ के जग लागे बेगाना,

मुझे देख अकेला ओ सांवरियां दुनिया सताये जाती है,

के कब मिलोगे सँवारे पूछे जाती है,

मेरी नजरे तेरी नजरो को...

बरसो यु बीत गये है मैं तो बस बोलता हु,

ये मूरत भी कभी बोलेगी यही तो बस सोचता हु,

तेरा चुप रहना यु कुछ न कहना ये बाते खाई जाती है,

के कब मिलोगे सँवारे पूछे जाती है,

मेरी नजरे तेरी नजरो को...

बड़ा सुना है सँवारे तू हारे का है सहारा,

मेरे लिये ही क्यों बंद है श्याम ये तेरा द्वारा,

तू हारे का साथी यही तो बाती आस बढ़ाये जाती है,

के कब मिलोगे सँवारे पूछे जाती है,

मेरी नजरे तेरी नजरो को...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।