जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना,

मात की पिता सेवा सीते तुम यही रह कर करना,

जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना,

तन से जुदा हो कर हे प्रीतम आत्मा क्या रह सकती है,

बिछड़ के सांसो से दड़कन क्या इक पल भी चल सकती है,

मेरा भी कैसे स्वामी तुम बिन बाकी रह सकता है जीवन,

जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना,

मात पिता सी आज्ञा मिली है,

मुझको अकेले जाने की,

कैसी कर सकता हु भूल सिये तुमको संग ले जाने की,

मुझको अकेले ही वन जाना माता पिता के तुम वचन निभाना,

जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना,

पत्नी के लिए मेरे स्वामी पति की सेवा सब से बड़ी है,

पर अह्भागान की देखो किस्मत कितनी बिगड़ी पड़ी है,

यु न दुखाओ सीते तुम मन चलो हमारे संग तुम भी वन,

जाते हो वनवास पिया मुझको भी संग ले चलना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।