हमे श्याम जीने का बहाना न मिलता,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हमे श्याम जीने का बहाना न मिलता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

भटक ते ही रहते ठिकाना न मिलता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

बे रंग दुनिया फीके नजारे,

पराये से दिखते थे अपने ही सारे,

भाग ये उमीदो का फिर से न खिलता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

तेरे सिवा मेरी सुनता न कोई,

तेरे ही आगे श्याम मेरी आंख रोइ,

जख्म मेरे दिल के कोई न सिलता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

जब से तुम्हे श्याम माना है अपना,

पूरा हुआ मेरे जीवन का सपना,

सपने ये खुशीओं के कोई न बुनता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

खुशियों से तूने भर दिया दामन,

तुम से महक ता है मेरा घर आँगन,

रोमी किरपा का खजाना न मिलता,

तेरे दर ना आते तेरे दर ना आते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।