आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आवेगी भावना वाली मारी जा अवाजा मारी जा,

आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा,

पलका नु बना ले पोकर तू रस्ते नु भुखारी जा,

आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा,

सुन अरजा दौड़ी आवे माँ कम नहीं कोई देरी दा,

रात बरात दी फ़िक्र करे ना चीजका मीह हनेरी दा,

जिह्ना चरना तो चल औना ओहना चरना तो बलिहारी जा,

आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा,

जाने अनजाने होइया जो भुला बक्शोनो भूली न,

लोब दा जंगल कंडेया दा बन मंगता भटकी रुली न,

मंगनी है नाम दी दौलत बाकि सब नु विसारी जा,

आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा,

जे मन खोटा नीयत खोटी सच्ची सरकार ने औना नि,

ये स्वार्थ नाल भुलावे गा माता ने फेरा पाउना नहीं,

कुज लेना सरल कवलेया दर ते डिगी इक वारि जा,

आवेगी शेरावाली मारी जा आवाजा मारी जा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।